Wednesday, February 18, 2009

खौफ्फ़ लगता है ...

खुदा से डरते हो तो थोड़ा और डरो ,
और नही डरते तो दोस्ती की इबादत करो ,
एक उमर बाद मिले कुछ दोस्त जो थे दोस्त से बढ़कर ,
जो रहते थे घर में कम और दिल में ज़्यादा ,
जिनके साथ पी मैंने सुबह की चाय और रात की हस्सी ,
जो न थे मेरे रिश्तेदार , ना मेरे हमदम ,
पर बन गए जो मेरे दिल की धड़कन ...
आज एक उमर गुज़र सी गई है ,
और याद नही जाती उनकी जो थे करीब दिल के ,
किसी के चेहरे की रौनक याद है , किसी की प्यारी हस्सी ,
और कोई थी ही इतनी हसीं की हसीना लगती थी ,
कोई इतनी समझ्धार की सबको लेकर चले साथ ,
तो किसी में बचपना भरा हुवा ,
कहीं तेज़ हवा का झोंका था , तो कोई मस्त मौला था ,
कोई चीनी की तरह घुल गया दोस्ती में ,
और कहीं कोई पिट भी गया प्यार में ,
कुछ तो शादी केर के निकल लिए ,
तो किसी ने तलाश लिया जीवन साथी ,
कहीं पर कोई गाना किसी की याद दिला देता है ,
तो कहीं सिनेमा का साथ है ...
पर जो बात इनमे में है वोह है नही कहीं ,
वोह रात को २ बजे चाय बनाना ,
भाई में बनाता हूँ तुम बैठो ,
और छोड़ आएगा दीपक सुबह ७ बजे ,
वोह अँगरेज़ देख के सलीम फेंकू को याद करना ,
तो कहीं अपने सैफ का स्टाइल ,
वोह न फ स के लंबे सफर ,
नही भूलती है मुझे सुबह ४ बजे की गपशप ,
न भूलती है सुबह ६ बजे खाना हल्का फुल्का खाना ,
और न ही भूलती है वोह डरावनी रात का बाना ,
तो याद है दीपक जी के घर का हवन ,
कहीं कुछ नही भूला है यह लड़का ,
जाने तू या जाने ना देखकर आया था साथ तेरे ,
और आज तक तू साथ है मेरे ,
चाहे जाने तू या जाने ना ,
कहीं ऐसा न हो की में भूल जाऊँ ,
वोह लम्बी लम्बी ई-मेल के सिलसिले ,
वोह पेट्रोल पम्प के किस्से ,
वोह सी सी दी की काफ़ी ,
और टर्मिनल की चाय ,
कहीं भूल न जाऊँ में ,
वोह लम्बी बातें , वोह लंबे सफर ,
वोह उमर से ज़्यादा घेहरी यादें ,
वोह मुझ से ज़्यादा में ....
खौफ्फ़ लगता है की कहीं भूल न जाऊँ में ,
कहीं भूल न जाए तू ...
कहीं हम भूल न जाए एक दूसरे को ...
डर लगता है दोस्त मेरे ....


8 comments:

  1. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  2. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

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  3. आपके प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया , पर में बहुत समय से लिख रहा हूँ । कभी भी यह नही पता था की इतने कद्रदार है हिन्दी भाषा के इधर । मेरी और कवितायेँ आती रहेंगी ।

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  4. दोस्ती के अहसास की सुंदर अभिव्यक्ति. स्वागत.

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  5. ब्लोग जगत मे स्वागत
    शुभकामनाएं
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  6. khauff lagta hai . aur lagna bhi chaiye ... is dosti ki kadi der kadi alag ho rahi hai aur yaadein dil mein jali ja rahi hai . agar poori dosti per sab kisso ko kavita mein bayaan na kiya to adhoori reh jayegi zindagi

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